लाल किले के पीछे छुपा ‘घूंघट’ का राज, जिसे जानकर हैरान रह जाएंगे

लाल किले के पीछे छुपा ‘घूंघट’ का राज, जिसे जानकर हैरान रह जाएंगे

An Untold Tale of the Red Fort

An Untold Tale of the Red Fort

नई दिल्ली: An Untold Tale of the Red Fort: जिसे आज हम भारत की आन-बान और शान का प्रतीक लाल किला कहते हैं, वह कभी मुगल बादशाह शाहजहां की नजरों में एक घूंघट वाली दुल्हन बन गया था।

यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह इतिहास के उस दिलचस्प मोड़ की कहानी है, जहां एक पिता यानी शाहजहां और बेटे यानी औरंगजेब की सोच आपस में टकरा गई थी।

29 अप्रैल 1639 को आज से 387 साल पहले जब इस किले की नींव रखी गई, तो शाहजहां का मकसद सिर्फ एक सुरक्षा घेरा बनाना नहीं था। वे आगरा की तंग गलियों और मुमताज की यादों से दूर यमुना के किनारे एक स्वर्ग बसाना चाहते थे।

  • वास्तुकार: उस्ताद अहमद लाहौरी, जिन्होंने ताजमहल डिजाइन किया।
  • लागत और समय: करीब 9 साल की मेहनत और धौलपुर व फतेहपुर सीकरी से आए लाल बलुआ पत्थरों का संगम।
  • खासियत: किले के भीतर 'नहर-ए-बहिश्त' जैसी जलधारा, जो महलों को प्राकृतिक रूप से एयर-कंडीशन रखती थी।

विवाद का केंद्र किले को क्यों पहनाया गया घूंघट?

प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखिका राना सफनी की पुस्तक 'सिटी ऑफ माय हार्ट' में लाल किले को घूंघट वाली दुल्हन करने का जिक्र मिलता है। अन्य इतिहासकारों ने भी इसका जिक्र किया है।

इतिहास में लाल किले की सुंदरता की चर्चा होती है, लेकिन इसके घूंघट वाली कहानी औरंगजेब के दौर से जुड़ी है। जब शाहजहां के बाद औरंगजेब ने सत्ता संभाली, तो उसने सुरक्षा कारणों से लाहौरी और दिल्ली गेट के सामने एक बाहरी दीवार बनवा दी।

उसका तर्क था कि हमलावर सीधे किले में न घुस सकें, लेकिन जब कैद में मौजूद शाहजहां को इस दीवार के निर्माण का पता चला, तो वे बेहद आहत हुए। उन्होंने औरंगजेब को एक तंज भरी चिट्ठी लिखी और कहा- तुमने किले को एक दुल्हन बना दिया है और उसके चेहरे पर घूंघट डाल दिया।

शाहजहा का मानना था कि औरंगजेब ने उस भव्य प्रवेश द्वार की खूबसूरती को ढक दिया है, जिसे दुनिया को निहारना चाहिए था। इसी ऐतिहासिक तंज के बाद उस दीवार को 'घूंघट वाली दीवार' कहा जाने लगा।

आज का लाल किला: विरासत का सफर

256 एकड़ में फैला यह किला आज न केवल भारत की आजादी का गवाह है, बल्कि दुनिया के लिए एक बेशकीमती विरासत भी है। यूनेस्को से 2007 में विश्व धरोहर का दर्जा मिला। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इसका सरंक्षण करता है।

आज जब हम लाल किले के लाहौरी गेट से प्रवेश करते हैं, तो हम अनजाने में उसी घूंघट (बाहरी दीवार) के पीछे से गुजरते हैं। जिसने कभी एक बादशाह को दुखी कर दिया था। यह दीवार आज भी इस बात की गवाह है कि कैसे वक्त के साथ कला और सुरक्षा की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं।

यह भी जानिये

  • लाल किला की आधारशिला 29 अप्रैल 1638 को रखी गई थी।
  • लाल किला के निर्माण में एक करोड़ रुपये का खर्च आया था।
  • लाल किले की दीवारों की लंम्बाई 2.5 किलोमीटर है। दीवारों की ऊचाई यमुना नदी की ओर 18 मीटर है और शहर की ओर 33 मीटर है।
  • महल किले के पूर्वी दिशा में स्थित है। दो भव्य तीन मंजिला मुख्य प्रवेश द्वार, जिनके बगल में अ‌र्द्ध अष्टभुजाकार बुर्ज हैं और जिनमें कई कमरे हैं।
  • पश्चिम और दक्षिण दिशाओं के मध्य में स्थित हैं, जिन्हें आप क्रमश: लाहौरी और दिल्ली दरवाजों के नाम से भी जानते हैं।